- डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड में “पूर्ण पहुंच” मिलनी चाहिए, जिससे विवाद शुरू हुआ।
- ग्रीनलैंड और डेनमार्क ने स्पष्ट किया कि उनका संपूर्ण स्वाभिमान (sovereignty) कभी नहीं छोड़ा जाएगा — यही उनकी रेड लाइन है।
- डेनमार्क ने आर्कटिक में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई और वहाँ बल तैनात किए, ताकि सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
- यूरोपीय नेताओं ने भी ग्रीनलैंड के अधिकार का समर्थन किया और कहा कि कोई भी निर्णय केवल स्थानीय और डेनिश सहमति से ही हो सकता है।
यह मामला आर्कटिक की रणनीतिकता, सुरक्षा और वैश्विक राजनीति में बदलते संतुलन को दर्शाता है।
